हज़ारों और कोरोना वायरस आपदा खड़ी करने के इंतज़ार में हैं..! | There are thousands more corona viruses in animals posing threat to human beings | rest-of-world – News in Hindi

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महामारी (Pandemic) के जानकारों ने कोरोना वायरस (corona virus) की पशु जगत में भारी मौजूदगी को दर्ज कर इससे पैदा होने वाले खतरे (Threats) भी बताए हैं. एक डेटाबेस की मानें तो जानवरों में करीब 30 हज़ार आइसोलेटेड (Isolated) कोरोना वायरस हैं. अगर एक-दो बार ऐसा हो सकता है कि किसी जानवर (Animals) या पक्षी के ज़रिए कोई कोरोना वायरस इंसानों के लिए कहर बन सकता है, तो हज़ारों बार भी ऐसा हो सकता है. कैसे?

कोरोना वायरस को चीनी वायरस (Chinese Virus) कहना कहां तक जायज़ है? क्या कोविड 19 (Covid 19) का खतरा सिर्फ एक बार का है? इस महामारी के लिए कौन ज़िम्मेदार है? क्या इंसान? और क्यों हमारा अब चेत जाना ज़रूरी है? इन तमाम पहलुओं पर विशेषज्ञों के हवाले से कुछ कम सुने और समझे गए तथ्य जब आप जानेंगे, तो कुछ देर के लिए विचार करने पर मजबूर ज़रूर हो सकते हैं. कोई प्रेरणा मिल जाए, तो बात ही क्या.

चमगादड़ों का इकोसिस्टम
अब तक जितनी रिसर्च हो सकी है, उसके मुताबिक माना यही जा रहा है कि कोरोना वायरस चमगादड़ों के ज़रिए मनुष्यों में पहुंचा है, जैसे कुछ साल पहले एबोला वायरस पहुंचा था. अब सवाल यह है कि यह हुआ कैसे. चमगादड़ इंसानी बस्तियों से बहुत दूर की बात थे, लेकिन जंगलों के लगातार कटने और शहरीकरण बढ़ने के कारण चमगादड़ों का इकोसिस्टम मनुष्यों ने प्रभावित किया है. इसलिए किसी भी दूसरे स्तनधारी की तुलना में ज़्यादा वायरसों को आश्रय देने वाला चमगादड़ मनुष्यों के इकोसिस्टम में सीधे घुसपैठ कर पा रहा है.वायरस कैसे बनाता है रास्ता?

ग्लोबल वैक्सीनेशन इनिशिएटिव से जुड़े महामारी विशेषज्ञ डॉ. बर्कले के हवाले से फोर्ब्स की एक रिपोर्ट की मानें तो कोरोना या अन्य कोई चमगादड़ों से पहले मवेशियों या बिल्लियों और छिपकलियों में फैल सकता है. कोविड 19 का रास्ता भी यही माना जा रहा है कि यह महामारी इस तरह मनुष्यों तक पहुंची. 2002 में सार्स और फिर मर्स के बाद यह तीसरी बार है जब तीसरे किस्म के कोरोना वायरस ने मनुष्यों की दुनिया में घुसपैठ की.

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हम क्यों नहीं करते काम की रिसर्च?
महामारी विशेषज्ञों ने पशु जगत में मौजूद 30 हज़ार ऐसे वायरसों के बारे में अध्ययन का प्रस्ताव रखा, जिनके लिए मनुष्यों की कोशिकाएं रिसेप्टर हो सकती हैं. बर्कले कहते हैं कि ‘समस्या यह है कि हम ऐसे शोध करना ही नहीं चाहते’. बर्कले के मुताबिक इस तरह के कई वायरसों के आगामी खतरों से मुंह फेर लेना बेवकूफी है.

वायरस या मनुष्य – आख़िर घुसपैठिया कौन है?
आधुनिक समय में महामारियों की वास्तविक कहानी यह नहीं है कि जानवर या रोगाणु कैसे इंसानी दुनिया में घुसपैठ कर रहे हैं बल्कि कहानी यह है कि कैसे हम उनकी दुनिया में घुसपैठ कर चुके हैं? 2017 की बेस्टसेलर किताबों में शुमार ‘पैनडैमिक’ की लेखिका सोनिया शाह इस नैरेटिव से बात को समझना आसान करते हुए बताती हैं कि उन्होंने पाया कि कोलेरा से लेकर वेस्ट नाइल वायरस या एबोला तक, उन्होंने देखा ​है कि मनुष्यों का कितना बड़ा हाथ इसके पीछे रहा है और मनुष्यों की इस भूमिका पर कितनी कम बात हुई है.

कोरोना वायरस कोई बीमारी नहीं है!
शाह ने वॉक्स को जो इंटरव्यू दिया है, उसे ध्यान से पढ़ा जाना चाहिए. इसमें शाह ने अहम पहलू छेड़ते हुए कहा है कि माइक्रोब्स यानी सूक्ष्म जीव हर प्रजाति में हैं. एबोला चमगादड़ों के शरीर में बीमारी पैदा नहीं करता क्योंकि यह सूक्ष्म जीव चमगादड़ के शरीर के अनुकूल हो जाता है. ये हमारे शरीर में बीमारी पैदा करता है क्योंकि हमारा शरीर इसके लिए मुफ़ीद ठिकाना नहीं है. और यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि मनुष्यों के ज़रिए जानवरों में भी कई तरह के माइक्रोब्स पहुंचते हैं, जो उन्हें बीमार भी करते हैं.

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न्यूज़18 क्रिएटिव

अमेरिका के बीमारी को विदेशी कहने का मतलब?
सामान्य तौर पर हर बार अमेरिका का नज़रिया यही रहा है कि वह किसी भी महामारी को बाहरी करार देता है, जैसे इस बार कोरोना वायरस को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘चीनी वायरस’ कह दिया. इस बारे में विशेषज्ञ सोनिया शाह का कहना है कि यह ग़लत या भ्रामक नज़रिया है.

शाह उदाहरण देकर बताती हैं कि 1999 में वेस्ट नाइल वायरस को अफ्रीका के प्रवासी पक्षियों से फैलना बताया गया लेकिन उत्तर अमेरिका में सैकड़ों सालों से मौजूद था लेकिन बीमारी फैलने से पहले तक किसी को पता नहीं था. अस्ल में, होता यह है कि पक्षियों से सीधे मनुष्यों में वायरस नहीं आता बल्कि एक चेन बनती है. उदाहरण के तौर पर जैसे कोई मच्छर किसी वायरस युक्त पक्षी को काटे और वही मच्छर फिर मनुष्य को.

अब कारणों को समझें
पहला कारण है जैव विविधता का सत्यानाश. द कन्वर्सेशन की रिपोर्ट पढ़ी जाना चाहिए जो विस्तार से बताती है कि कोरोना वायरस के प्रकोप से हमें क्या सबक लेने चाहिए. इस​ रिपोर्ट के मुताबिक मानव इतिहास में इस समय बायो डायवर्सिटी सबसे तेज़ी के साथ खत्म होने के दौर में है.

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मनुष्यों ने प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर कई जीवों के प्राकृतिक घर छीन लिये हैं. फाइल फोटो

1. जंगलों के साथ हमने जानवरों, पक्षियों और कीटों की दुनिया को तेज़ी से खत्म किया है. इसका नतीजा यह है कि यह अलग दुनिया हमारी दुनिया के साथ करीब से जुड़ गई है और बीमारियों का फैलना बड़ा खतरा पैदा हो चुका है.
2. कन्वर्सेशन की रिपोर्ट की ही मानें तो क्लाइमेट चेंज ने हमारे स्वास्थ्य के लिए कई खतरे पैदा कर दिए हैं. कोविड 19 जैसी संक्रामक बीमारियों की बात हो तो प्रदूषण इसके लिए एक स्तर पर खतरा पैदा करता है. जल और वायु प्रदूषण ने महामारियों की चपेट में आने की आशंकाएं बढ़ा दी हैं.
3. फोर्ब्स की एक और रिपोर्ट के अनुसार बढ़ते शहरीकरण और जंगलों के खत्म होने के संदर्भ में यूरोपीय वैज्ञानिकों ने 2018 में एक लेख लिखा था, जिसके मुताबिक पर्यावरणीय बदलावों के कारण खतरे बढ़ रहे हैं. इसी लेख में चमगादड़ों के छेड़े गए इकोसिस्टम के बारे में चेताया गया था.

हमें आपदाओं पर आपदाओं पर आपदाओं के झटके लगते रहेंगे, जब तक हम प्रकृति के साथ मूलभूत रिश्ते की शुरूआत करने के लिए खुद को सच में नहीं बदलते.

– सोनिया शाह, ‘पैनडैमिक’ की लेखक

कुल मिलाकर, अब कोविड 19 जैसी महामारी के बाद पूरी इंसानी जमात को कुछ बिंदुओं पर गंभीरता से विचार और फिर अमल करना ही होगा. एचआईवी, एबोला, ज़ीका, हेंड्रा, सार्स, मर्स, बर्ड फ्लू जैसे वायरसजनित रोगों के बाद यह एक और खतरे की घंटी है, जो चेता रही है कि अब भी नहीं चेते तो ‘हमारा ज़िक्र तक न होगा दास्तानों में’.

प्रकृति के साथ छेड़छाड़ बंद करना, सामंजस्य बनाना, जैव विविधता के लिए ईमानदार कोशिशें करना, क्लाइमेट चेंज को काबू करने के उपाय करना, ज़रूरी शोधों के लिए माहौल बनाना, जागरूकता फैलाने के साथ ही स्वास्थ्य और प्राकृतिक सुरक्षा को दुनिया की पहली प्राथमिकता बनाने का समय है. सबक़ लेने ही होंगे.

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