स्‍टडी में दावा : कोरोना के मरीजों पर असरकारक हैं हाइड्रोक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन और एजिथ्रोमाइसिन दवाएं | Claims in the research: hydroxychloroquine and azithromycin medications effective on corona patients | rest-of-world – News in Hindi

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स्‍टडी में दावा : कोरोना के मरीजों पर असरकारक हैं हाइड्रोक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन और एजिथ्रोमाइसिन दवाएं

हाइड्रोक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन और एजिथ्रोमाइसिन दवाओं के जरिये कोरोना के संक्रमण पर काबू पाने की कोशिश की जा रही है.

दावा क‍िया जा रहा है क‍ि इन दवाओं के इस्‍तेमाल से मरीजों पर अभी तक कोई साइड इफेक्‍ट सामने नहीं आए हैैं.

पेरिस. कोरोना वायरस (Corona virus) के इलाज के लिए दो दवाओं का जिक्र सबसे ज्‍यादा सामने आ रहा है. इसमें एक है हाइड्रोक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन (Hydroxychloroquine) और एजिथ्रोमाइसिन (Azithromycin). इन दवाओं के जरिये इस समय कोरोना के संक्रमण पर काबू पाने की कोशिश की जा रही है. इनसे इस समय कई देशों में इलाज भी किया जा रहा है. इनमें चीन, फ्रांस और भारत खासतौर पर शामिल हैं, जहां इनसे मरीजों का इलाज जारी है. वहीं अन्‍य देश भी यही दवाएं कोरोना के इलाज के लिए अपना रहे हैं. वहां इसका रिजल्‍ट भी अच्‍छा दिखाई दे रहा है. इन दवाओं के इस्‍तेमाल से मरीजों को फायदा होता दिख रहा है और वे स्‍वस्‍थ हो रहे हैं. भारत की बात की जाए तो यहां यह दवा अच्‍छी मात्रा में उपलब्‍ध है. यही वजह से कि इसकी मांग भी बढ़ रही है और कई देशों की ओर से इसकी मांग की जा रही है.

फ्रांस भी इस समय कोरोना की चपेट में है और इस वायरस से उबरने को संघर्ष कर रहा है. फ्रांस में कोरोना के 1061 मरीजों का इलाज किया गया. वहीं यह भी देखा गया कि इससे 973 मरीज पूरी तरह स्‍वस्‍थ हो गए और उनमें यह संक्रमण नहीं रहा. इन दवाओं से इलाज करने के बाद जो परिणाम सामने आए उनमें यह अच्‍छी बात रही कि इनसे इलाज करने के बाद मरीज को किसी भी तरह का कार्डियक का खतरा नहीं रहता.

मरीजों पर इनके अच्‍छे परिणाम सामने आए
वहीं फ्रांस के मार्सिले में आईएचयू मेडिटरीन इंफेक्‍शन के मशहूर संक्रमण रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर दिदिएर रोल्‍ट के मुताबिक हाइड्रोक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन और एजिथ्रोमाइसिन दवाएं कोरोन के इलाज में कितनी असर कारक साबित हो रही हैं, यह जानने के लिए इन पर स्‍टडी की गई. three मार्च से 9 अप्रैल तक 59 हजार से अधिक नमूनों की जांच की. इससे बाद 38 हजार, 617 मरीजों में इस संक्रमण की जांच की गई. जिनमें तीन हजार से ज्‍यादा मरीज कोरोना पॉजिटिव पाए गए. वहीं उन्‍होंने बताया कि इनमें से 1061 मरीजों का इलाज इंस्‍टीट्यूट में किया गया. 10 दिनों तक इससे इलाज करने के बाद यह परिणाम सामने आया कि इससे किए गए इलाज की वजह से 973 मरीज पूरी तरह स्‍वस्‍थ हो गए. न ही इन दवाओं के कोई साइड इफेक्‍ट ही सामने आए. वहीं जो 47 मरीज थे उनमें संक्रमण के लक्षण लंबे समय तक रहे. वहीं 10 मरीज ऐसे भी थे जिन्‍हें आईसीयू में रखना पड़ा. हालांकि इस बीच 5 की मौत भी हुई. इनकी उम्र 74 से 95 साल के बीच थी.डॉक्‍टर की सलाह पर ही मरीजों को दी जानी चाहिए ये दवाएं

भारत में भी इन दवाओं के जरिये कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा है. हालांकि आईसीएमआर का कहना है कि यह दवा उन्‍हीं मरीजों को दी जा रही है जो या तो आईसीयू में हैं या फिर वेंटिलेटर पर हैं. वहीं यह दवा कितनी मात्रा में लेनी है यह डॉक्‍टर की सलाह पर निर्भर है और उन्‍हीं के मुताबि‍क यह मरीज को देनी चाहिए.

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First revealed: April 11, 2020, 10:42 AM IST



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