दुनिया में कोरोना से जंग में महिला लीडर बनीं वॉरियर फिर क्यों आधी आबादी पर नहीं है पूरा भरोसा?|women leaders doing great job while combating corona virus in world | relaxation-of-world – News in Hindi

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दुनिया भर के 200 से ज्यादा देशों में कोरोना का कोहराम गूंज रहा है. मौत और संक्रमण के आंकड़े हर दिन डरावनी तस्वीरों के साथ सामने आ रहे हैं. लेकिन इसी हाहाकार में कुछ ऐसे देश भी हैं जहां कोरोना की क्रूरता से नाज़ुक मिज़ाजी के साथ लोहा लिया जा रहा है. ये देश कोरोनावायरस पर लगाम कसने में कामयाब होते दिख रहे हैं. इन देशों की खास बात ये है कि इनकी कमान महिला लीडर्स के हाथ में है.

ताईवान ने कोरोना की आहट को शुरुआत में ही भांप लिया जिस वजह से एहतियाती सुरक्षा बरतने में देर नहीं की और महामारी को फैलने से रोक दिया. आज ताईवान के हालात ये हैं कि वो यूरोपीय देशों को लाखों मास्क बना कर एक्सपोर्ट कर रहा है. जबकि दूसरे देश जो कि कभी मेडिकल सुविधा के नाम पर दुनिया में पहले या दूसरे पायदान पर होते थे वहां अस्पतालों की हालत वेंटिलेटर पर आ चुकी है क्योंकि उन देशों ने कोरोना को लेकर समय पर कड़े कदम नहीं उठाए.

यूरोपीय देशों में जर्मनी पहले नंबर पर है जिसने कोरोना की जांच के लिए सबसे ज्यादा टेस्टिंग कराई और हर हफ्ते टेस्ट कार्यक्रम चलाए. कोरोनावायरस के लक्षणों को शुरुआत में ही जांच कर मरीज़ और उसके कॉन्टेक्ट को अलग-थलग कर प्रभावी इलाज किया.

इसी तरह न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री ने कोरोनावायरस की दस्तक पर बिना देर किए तुरंत ही सख्त लॉकडाउन का ऐलान कर दिया. साथ ही टूरिज़्म को भी बंद कर दिया. जिस वजह से कोरोना से न्यूजीलैंड में मौत के आंकड़े को 9 तक ही सीमित करने में कामयाबी मिल सकी.कोरोना महामारी से मुकाबले में इन तीनों लीडर्स के प्रभावी नेतृत्व और कार्य क्षमता की वजह से दुनिया में सम्मान बढ़ा है. एक देश यूरोप का दिल है तो दूसरा एशिया का तो तीसरा दक्षिणी प्रशांत का.

लेकिन तीनों देशों में एक बात सामान्य है कि इनकी कमान महिलाओं के हाथ में है.

इन देशों के महिला राष्ट्राध्यक्षों ने कोरोनावायरस की जानकारी मिलने के साथ ही तुरंत एक्शन लिया और कोरोना संक्रमण को पहली स्टेज पर ही रोक दिया. उन्होंने व्यापक जांच, आसानी से मिलने वाला क्वालिटी ट्रीटमेंट, आक्रमक कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग और सोशल डिस्टेंसिंग के कड़े नियम के जरिए कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने में कामयाबी पाई.

ताईवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन को जब पहली दफे चीन के वुहान से रहस्यमय वायरस की खबर मिली तो उन्होंने तत्काल ही चीन से आने वाली उड़ानों को सीमित कर दिया. वहां से आए लोगों की स्क्रीनिंग की गई और उन्हें क्वारेंटीन में भेजा गया. लेकिन जैसे ही मामले थोड़े बढ़े तो उन्होंने चीन,हांगकांग और मकाऊ से जुड़ी सभी उड़ानें बद कर दीं. उन्होंने सेंट्रल एपिडेमिक कमांड सेंटर शुरू कर दिया. साथ ही जनता और हेल्थ वर्कर्स के लिए पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट का प्रोडक्शन तेज कर दिया. इसके साथ ही ताईवान ने बड़ी संख्या में मास्क बनाने शुरू कर दिए. आज ताईवान एक दिन में एक करोड़ मास्क बना सकता है. ताईवान ने जिस तरह से पहले चरण में ही कोरोना को रौंदने का काम किया उसी का नतीजा है कि अब तक ताईवान में कुल 393 संक्रमण के मामले सामने आए हैं जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी जारी की थी कि  ताईवान को चीन का पड़ौसी होने की सबसे ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी.

ताईवान की राष्ट्रपति लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमक्स से पीएचडी हैं.

ताईवान की राष्ट्रपति लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स से पीएचडी हैं. फोटो साभार/एपी

ताईवान की राष्ट्रपति लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स से पीएचडी हैं. फोटो साभार/एपी

जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने जर्मनी में कोरोना से मुकाबले में गजब का जीवट दिखाया. हालांकि जर्मनी में संक्रमण के 132000 मामले हो चुके हैं लेकिन जर्मनी में डेथ रेट बहुत कम है. खासतौर से बाकी यूरोपीय देशों के मुकाबले जर्मनी में मृत्यु दर चिंताजनक नहीं है. जर्मनी में आज सबसे ज्यादा आईसीयू बेड्स हैं और अन्य यूरोपीय देशों के मुकाबले जर्मनी ने सबस ज्यादा कोरोना के टेस्ट किए हैं.

एंजेला मर्केल क्वांटम कैमिस्ट्री में पीएचडी हैं.

जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने जर्मनी में कोरोना से मुकाबले में गजब का जीवट दिखाया. फोटो साभार/एपी

जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने जर्मनी में कोरोना से मुकाबले में गजब का जीवट दिखाया. फोटो साभार/एपी

न्यूजीलैंड की इकॉनमी पूरी तरह टूरिज़्म पर आधारित है. 50 लाख की आबादी वाले देश की पीएम जेसिंडा आर्डर्न ने 19 मार्च से ही विदेशी पर्यटकों की आवाजाही पर रोक लगा दी थी. 23 मार्च को उन्होंने एक महीने के लॉकडाउन का ऐलान कर दिया था. जिस वजह से न्यूजीलैंड में कोरोना संक्रमण के सिर्फ 1300 मामले सामने आए तो केवल 9 जानें गईं.

देश की पीएम जेसिंडा आर्डर्न ने 19 मार्च से ही विदेशी पर्यटकों की आवाजाही पर रोक लगा दी थी. फोटो साभार/एपी

देश की पीएम जेसिंडा आर्डर्न ने 19 मार्च से ही विदेशी पर्यटकों की आवाजाही पर रोक लगा दी थी. फोटो साभार/एपी

इसी तरह फिनलैंड की 34 वर्षीय प्रधानमंत्री सना मरीन ने कोरोना महामारी से निपटने में तुरंत एक्शन लिया और उनकी अनुभवहीनता और कम उम्र आड़े नहीं आई.

फिनलैंड की 34 वर्षीय प्रधानमंत्री सना मरीन की भी कोरोना महामारी से निपटने की तैयारी की वजह से दुनिया में तारीफ हो रही है. फोटो साभार/ट्विटर

फिनलैंड की 34 वर्षीय प्रधानमंत्री सना मरीन की भी कोरोना महामारी से निपटने की तैयारी की वजह से दुनिया में तारीफ हो रही है. फोटो साभार/ट्विटर

कोरोना संक्रमण के मामलों को सीमित करने की वजह से दुनिया में सना मरीन की तारीफ हो रही है. 55 लाख की आबादी वाले फिनलैंड में कोरोना से केवल 59 मौतें हुई हैं. ऐसे में इन महिलाओं ने महामारी से लड़ाई में एक अलग ही बेंचमार्क स्थापित किया है. जबकि अगर दूसरे उन देशों की तरफ देखें जहां कोरोना ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया है तो वहां की कमान पुरुष राष्ट्राध्यक्षों के हाथ में है.



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