क्या इस देश में बैन है कोरोना वायरस शब्द बोलना? बोला तो गिरफ्तारी? | Know about pandemic situation in central asia country which allegedly banned the word corona virus | rest-of-world – News in Hindi

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दुनिया के कई देश हैं जो कोविड 19 (Covid 19) महामारी (Pandemic) से जूझ रहे हैं, वहीं एक देश ऐसा भी है जो ये दावा कर रहा है कि उसके यहां संक्रमण (Infection) का कोई मामला नहीं है. यही नहीं, महामारी की चपेट में बुरी तरह आ चुके ईरान (Iran) का पड़ोसी यह देश कोरोना वायरस (Corona Virus) से जुड़ी चर्चाओं को तूल देने में भी दिलचस्पी नहीं ले रहा. खबरें हैं कि यहां इस बारे में बोलने पर गिरफ्तारी हो रही है. सच क्या है? जानें क्या है पूरा मामला.

मध्य एशिया (Central Asia) के एक छोटे से देश तुर्कमेनिस्तान (Turkmenistan) से खबरें हैं कि सरकारी विभागों ने ‘कोरोना वायरस’ शब्द का बहिष्कार कर दिया है. इसके अलावा, अगर कोई सार्वजनिक स्थानों पर इस बारे में चर्चा करता पाया जा रहा है, तो उसे गिरफ्तार किया जा रहा है. लेकिन, इन बातों में कितनी सच्चाई है? इसके साथ ये भी जानना चाहिए कि कहीं ये सब फेक न्यूज़ (Fake News) का जाल तो नहीं.

तुर्कमेनिस्तान संक्रमण मुक्त है!
ईरान में कोविड 19 के अब तक करीब 50 हज़ार मामले सामने आ चुके हैं. इसके बावजूद सीमा साझा करने वाले पड़ोसी तुर्कमेनिस्तान का दावा है कि उसकी करीब 60 लाख की आबादी में अब तक इस महामारी का कोई मामला नहीं है. अब यह सच है या नहीं, इस पर सवालिया निशान लगा है.क्यों है दावे पर प्रश्नचिह्न?

तुर्कमेनिस्तान के संक्रमणमुक्त होने के दावे का सच जानना ज़रा टेढ़ी खीर साबित हो रहा है क्योंकि यहां प्रेस की आज़ादी बहुत कम ​है. मीडिया पर कई तरह के दबाव एवं प्रतिबंध रहते हैं. रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर यानी आरएसएफ ने 2019 के मीडिया स्वतंत्रता सर्वे में दुनिया के 180 देशों की सूची में तुर्कमेनिस्तान को आखिरी पायदान पर रखा था.

अब आप समझ सकते हैं कि यहां से सही और स्वतंत्र सूचनाएं मिलना मुश्किल है क्योंकि ज़्यादातर सरकार का नियंत्रण रहता है. दूसरी तरफ, यूरेशियानेट ने लिखा है, ‘तुर्कमेनिस्तान की व्यवस्था अब भी अस्वीकार करने के मूड में ही है.’

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तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रप्रमुख गुरबांगुली बरदीमुखामेदोव. (फाइल फोटो)

क्या सच में कोरोना वायरस शब्द प्रतिबंधित है?
असल में इस दावे के पीछे दो कहानियां हैं. पहली तो ये कि तुर्कमेनिस्तान क्रॉनिकल नामक एक स्वतंत्र समाचार स्रोत की रिपोर्ट में कहा गया कि देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्कूलों, अस्पतालों जैसे संस्थानों में बचाव संबंधी उपायों व चेतावनियों व​ निर्देश संबंधी जो ब्रोशर जारी किए, उनमें कोरोना वायरस या कोविड 19 शब्द का इस्तेमाल नहीं किया. स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर भी ये शब्द दर्ज नहीं हैं.

दूसरी बात ये कि एक और तुर्कमेनिस्तानी समाचार सेवा ने रिपोर्ट दी थी कि वैश्विक महामारी को लेकर सार्वजनिक स्थानों पर चर्चा करने वाले कुछ लोगों को सादे कपड़ों में तैनात पुलिस ने गिरफ्तार किया. इसके बाद हुआ ये कि दुनिया के मीडिया में खबरें इस तरह आईं कि तुर्कमेनिस्तान सरकार ने कोरोना वायरस शब्द के इस्तेमाल को ही प्रतिबंधित कर दिया है. द डिप्लोमेट की खबर की मानें तो न्यूज़वीक और एबीसी न्यूज़ पर इस तरह की खबरों के बाद इंटरनेट पर इन चर्चाओं ने ज़ोर पकड़ा.

मास्क पहनने पर गिरफ्तारी, मीडिया भी बेबस
आरएसएफ की खबर की हवाले से सीबीएस न्यूज़ ने लिखा है कि बस स्टॉप या सुपरमार्केट जैसे स्थानों पर अगर कोई चेहरे पर मास्क पहने या कोरोना वायरस को लेकर बातचीत करते हुए दिखे तो उसे गिरफ्तार किया जा रहा है. वहीं, ये भी कहा गया है कि मीडिया को इस बारे में रिपोर्टिंग करने को लेकर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए हैं इसलिए लोगों तक वैश्विक महामारी से जुड़े अपडेट भी नहीं पहुंच रहे.

क्या ​हैं तुर्कमेनिस्तान में महामारी के हालात?
जॉन होपकिन्स यूनिवर्सिटी के डेटा के हवाले से खबरें हैं कि वैश्विक महामारी के कारण three हज़ार से ज़्यादा मौतों की खबरें ईरान से आ चुकी हैं. इसके बावजूद पड़ोसी तुर्कमेनिस्तान का दावा कैसे आंका जाए. रायटर्स की रिपोर्ट के हवाले से सीबीएस ने लिखा है कि तुर्कमेनिस्तान सरकार ने पहले से काफी सख्त कदम उठाए. रेस्तरां, जिम, खेलकूद गतिविधियां, स्कूल आदि बंद कर सोशल डिस्टेंसिंग के सख्त कदम फरवरी में ही उठा लिए गए.

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फरवरी में ही तुर्कमेनिस्तान ने अपनी सीमाओं पर आवाजाही को लेकर आक्रामक प्रतिबंध लगा दिए थे. रायटर्स की इस रिपोर्ट के हवाले से ये जताया जा रहा है कि क्यों तुर्कमेनिस्तान में कोविड 19 के मामले अब तक नहीं हैं. लेकिन, इसका दूसरा पहलू भी है.

झूठ बोल रहा है तुर्कमेनिस्तान?
जॉन होपकिन्स यूनिवर्सिटी के डेटा की मानें तो दुनिया के 180 देशों में कोरोना वायरस के पुष्ट मामले हैं. ऐसे में क्या इन 180 देशों में तुर्कमेनिस्तान का शामिल न होना समझा जाए? द डिप्लोमेट की रिपोर्ट में साफ उल्लेख है कि तुर्कमेनिस्तान का इस महामारी को लेकर रवैया असंगत और आड़ा तिरछा दिख रहा है, जो यहां की जनता के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि तुर्कमेनिस्तान के पड़ोसियों और अंतरराष्ट्रीय रसूखदार देशों को नैतिक रूप से दखल देते हुए तुर्कमेनिस्तान में महामारी की वास्तविकता को सामने लाने के लिए दबाव बनाना चाहिए और तुर्कमेनिस्तान सच स्वीकार करे, इसकी कोशिश करनी चाहिए.

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