कोरोना वायरस से आई मंदी बढ़ा देगी रोबोट्स की तादाद | Know how Corona virus recession will cause more robots and fewer jobs | rest-of-world – News in Hindi

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कोरोना वायरस (Corona Virus) के संक्रमण का सबसे खराब असर जहां पड़ सकता है, उनमें से एक श्रम बाज़ार (Labor Market) है. आंकड़े चौंकाने वाले हैं कि कितनी नौकरियां जा सकती हैं और कैसे मनुष्यों के काम का विकल्प रोबोट (Robots) बन सकते हैं. ये हवाहवाई बातें नहीं हैं, बल्कि इस बारे में दुनिया में गंभीरता से विचार और क्रियान्वयन तक शुरू हो चुका है.

कोविड 19 (Covid 19) के फैलने से दुनिया के ज़्यादातर देशों की अ​र्थव्यवस्था (Global Economy) को बड़े झटके लगे हैं और लग रहे हैं. लॉकडाउन (Lockdown) और सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) के चलते उद्योगों के बंद होने के कारण लेबर मार्केट में बड़ी उथल पुथल पैदा होने के आसार दिख रहे हैं. ये तो तय है कि कोरोना के प्रकोप के बाद की दुनिया आर्थिक मंदी (Global Recession) से जूझ रही होगी, लेकिन अब आपको जानना चाहिए कि इस मंदी से कैसे रोबोट्स की तादाद बढ़ेगी और नौकरियों की कम हो जाएगी.

ऑटोमेशन बढ़ना तय है
अमेरिका के एक रिसर्च ग्रुप से जुड़े नीति निदेशक मार्क म्यूरो के हवाले से ब्रुकिंग्स इंस्टिट्यूट के ब्लॉग पर लिखा गया है कि लेबर के विकल्प के तौर पर ऑटोमेशन का बढ़ना तय है. कोविड 19 के बाद मंदी का जो असर होगा, उसमें मानवीय लेबर महंगा हो जाएगा और उद्योग जगत इसके विकल्प के तौर पर ऑटोमेशन का रुख करेगा, जो अब तक भी कई नौकरियों के लिए खतरा रहा है. इस खतरे की घंटी का पूरा मतलब समझा जाना चाहिए.पांच गुना तक बढ़ सकती है बेरोज़गारी

द हिल की मंगलवार की रिपोर्ट की मानें तो पिछले एक हफ्ते के दौरान अमेरिका में 30 लाख से ज़्यादा लोगों ने बेरोज़गारी से जुड़े लाभ लेने के दावे पेश किए हैं और कई लाख इस हफ्ते कर सकते हैं. इस रिपोर्ट में आर्थिक विश्लेषकों के हवाले से कहा गया है कि बेरोज़गारी की दर पांच गुना या उससे भी ज़्यादा हो सकती है.

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कम वेतन वालों पर ज़्यादा खतरा
सीधे कस्टमर से जुड़ने वाले जॉब्स करने वालों के लिए जोखिम की स्थिति ज़्यादा है. द हिल की ही रिपोर्ट की मानें तो वेटर, बारटेंडर, रिटेल सेक्टर के क्लर्क और होटल वर्करों जैसे कई जॉब्स करने वाले लोगों को नौकरी से निकाले जाने का खतरा साफ है. ज़ाहिर है कि ऐसे कामों के लिए रोबोटिक्स की मदद ​लेना आसान भी है और एक बार तकनीक पर खर्च करने के बाद यह लंबे समय के लिए सस्ता विकल्प भी साबित होगा.

कितने जॉब्स का विकल्प है मशीन?
ब्रुकिंग्स के म्यूरो ने वॉक्स न्यूज़ के साथ बातचीत में कहा कि विभिन्न श्रेणियों के उद्योगों और व्यवसायों में वर्तमान हालात के मुताबिक एक आंकड़ा यह है कि 3.6 करोड़ से ज़्यादा जॉब्स को मशीनें रिप्लेस कर सकती हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि इतने जॉब्स मशीनें करने वाली हैं बल्कि मतलब यह है कि इतनी बड़ी संख्या की नौकरियां कर रहे लोगों के काम को ‘रूटीन’ समझा जाता है और इसे रोबोट या सॉफ्टवेयर के ज़रिए रिप्लेस किया जा सकता है.

शुरू हो चुका है रोबोट्स का इस्तेमाल
मार्च 2020 के पहले हफ्ते में फोर्ब्स की ​एक रिपोर्ट रोबोट्स की बढ़ने वाली तादाद को लेकर चेता रही थी, जिसके मुताबिक रिटेल सेक्टर में रोबोट्स का इस्तेमाल शुरू हो चुका था. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि मेडिकल सेक्टर में भी संक्रमित मरीज़ों को दवा देने और अस्पताल के कमरों को डिसिन्फेक्ट करने जैसे कामों के लिए रोबोट्स के इस्तेमाल की शुरूआत हो चुकी है.

वहीं, ज़ीडीनेट की रिपोर्ट में कहा गया कि यूवीडी रोबोट्स नामक कंपनी ने ऐसा डिसिन्फेक्शन रोबोट विकसित कर लिया जो कोरोना वायरस से लड़ने में कारगर है क्योंकि यह रोबोट हवाई वायरसों और जीवाणुओं को नष्ट कर देता है. अस्पतालों से संक्रमण न फैले, इसलिए ऐसे रोबोट्स को कारगर बताने वाली इस रिपोर्ट में संभावना जताई गई कि कोरोना वायरस के प्रकोप के बाद यूवीडी रोबोट्स जैसी कंपनियां तेज़ी से बढ़ेंगी.

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फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार अस्पतालों को डिसिन्फेक्ट वाले रोबोट सक्रिय हो चुके हैं.

पहले से थीं योजनाएं?
एक्सियॉज़ की रिपोर्ट आपको चौंका सकती है क्योंकि इसके मुताबिक कोरोना वायरस के वैश्विक संक्रमण के पहले भी अमेरिका रोबोटिक्स तैनाती की योजना पर काम कर रहा था, लेकिन चीन के साथ चल रहे व्यापारिक गतिरोध के कारण उसे नुकसान हो रहा था. यानी रोबोटिक्स उत्पादन के लिए अमेरिका आत्मनिर्भर होने की कोशिशों में लग चुका था. इस रिपोर्ट के मुताबिक जो बदलाव हो रहे थे, कोविड 19 के बाद उन्हें और तेज़ गति मिलेगी.

कैसे काम रहे हैं रोबोट?
भारत भी रोबोट्स के प्रयोग से अछूता नहीं है. ईटी की बीते 27 मार्च की एक रिपोर्ट की मानें तो जयपुर के एक सरकारी अस्पताल में कोरोना पीड़ित मरीज़ों को भोजन और दवा देने के लिए रोबोटिक्स प्रणाली का प्रयोग किया गया. इसका मकसद यही था कि अस्पताल के स्टाफ को संक्रमण से बचाया जा सके. इस प्रयोग के सफल होने की पुष्टि होने के बाद इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने संबं​धी विचार जारी है.

वहीं, ट्यूनीशिया में लॉकडाउन के दौरान रोबोट की मदद से सड़कों पर वाहनों की निगरानी यानी पैट्रोलिंग का काम लिया गया ताकि पता चल सके कि किसी ने लॉकडाउन के नियम तोड़े या नहीं. कुल मिलाकर, सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि भारत जैसे कई देशों में कोविड 19 के बाद हालात ऐसे हो सकते हैं कि बेरोज़गारी बेतहाशा बढ़ती जाए और मनुष्य का विकल्प रोबोटिक्स प्रणाली या सॉफ्टवेयर तेज़ी से लेते दिखें.

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