आखिर क्यों अपने प्रमुख टेड्रोस के अतीत के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन पर उठ रहे सवाल | Know about world health organisation chief past related to alleged terrorism | relaxation-of-world – News in Hindi

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation). एक ऐसा नाम, जिसे आप बरसों से सुन रहे हैं और वर्तमान कोरोना वायरस (Corona Virus) संक्रमण के संकट के समय इसी संगठन के कई निर्देशों का पालन भी कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के अंतर्गत 7 अप्रैल 1948 को अस्तित्व में आए इस संगठन की वर्तमान भूमिका क्यों संदिग्ध है? क्या इस संगठन ने कोरोना संकट (Pandemic) के लिए चीन (China) को बचाने का काम किया? साथ ही, यह भी जानें कि इस संगठन प्रमुख का आतंकी संगठन (Terrorist Organisation) से क्या संबंध है.

चीन के वुहान (Wuhan) शहर से कोविड 19 (Covid 19) संक्रमण के दौर की शुरूआत हुई जो देखते ही देखते पूरी दुनिया का संकट बन गया. चीन पर सतर्कता न बरतने और संक्रमण को काबू करने के लिए उचित उपाय न अपनाने और पूरी दुनिया में संक्रमण (Infection) फैला देने के आरोप लगे, तो डब्ल्यूएचओ प्रमुख (WHO Chief) टेड्रोस ए घेब्रेयेसस ने चीन का बचाव किया. क्यों? इससे पहले टेड्रोस के अतीत के बारे में जानकर समझते हैं कि क्यों उन्हें आतंकवादी कहा जा रहा है.

इथोपिया के ‘आतंकी संगठन’ से संबंध
कोविड 19 के संदर्भ में चीन के बचाव ही नहीं, टेड्रोस के बारे में पता चला कि वह कम्युनिस्ट नेता रहे हैं. पॉलिटिकलाइट पोर्टल ने टेड्रोस की पुरानी तस्वीरों के साथ जो रिपोर्ट छापी है उसका शीर्षक है ‘डब्ल्यूएचओ का प्रमुख एक इथोपियन आतंकी है’. इस रिपोर्ट के मुताबिक टेड्रोस को टिगरे पीपल्स लिबरेशन फ्रंट/आर्मी का सदस्य बताकर कहा गया है कि वह इस संगठन के तीसरे सबसे महत्वपूर्ण पदाधिकारी थे.असल में, इस संगठन को इथोपिया की राजनीतिक पार्टी के रूप में देखा जाता है, लेकिन 1990 के दशक में अमेरिका ने इसे आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल किया था. द हिल की करीब 20 दिन पुरानी रिपोर्ट में भी ज़िक्र है कि यह पार्टी एक संघर्ष के बाद सत्ता में आई थी और 90 के दशक की शुरूआत में इसे ग्लोबल टेररिज़्म डेटाबेस में सूचीबद्ध किया गया था. इस पार्टी से जुड़े होने के कारण ही टेड्रोस को आतंकी कहा गया. क्या है इस पार्टी का सच?

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मौजूदा कोरोना संकट के मद्देनज़र विश्व स्वास्थ्य संगठन आलोचना का शिकार है. (फाइल फोटो)

टीपीएलएफ और टेड्रोस पर लगे कई आरोप
‘रणनीति के साथ भेदभाव और मानवाधिकार हनन’ के कई आरोप इस संगठन पर लग चुके हैं. पॉलिटिकलाइट ने लिखा है कि इस संगठन के प्रमुख सदस्यों में से एक टेड्रोस के इथोपिया के स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए अमहारा प्रजाति के लोगों में जन्मदर काफी कम हुई, साथ ही, इथोपिया की जनगणना के दौरान इस प्रजाति के 20 लाख सदस्य गायब कर दिए गए, जिसे एथनिक क्लीन्ज़िंग यानी नस्ली सफाई कहा गया.

साल 2000 और 2010 के दौरान इथोपिया में कॉलरा महामारी के समय भी टेड्रोस पर नज़रअंदाज़ी के आरोप लगे, जिन्हें उन्होंने नकारा. दूसरी तरफ, विदेश मंत्री रहते हुए टेड्रोस पर एक ब्रिटिश नागरिक को जबरन प्रताड़ित करने के आरोप भी लगे थे, जिससे बड़ा विवाद खड़ा हुआ था. इसके अलावा, नस्ली हिंसा को लेकर मा​नवाधिकार वॉच ने इथोपिया सरकार पर 400 मौतों, 70 हज़ार प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी और 15 हज़ार लोगों के विस्थापन का ज़िम्मेदार माना था.

ज़िम्बाब्वे के तानाशाह की नियुक्ति पर भी विवाद
पॉलिटिकलाइट और द हिल दोनों की रिपोर्ट में उल्लेख है कि 2017 में डब्ल्यूएचओ के प्रमुख का पद संभालने के ​बाद टेड्रोस ने ज़िम्बाब्वे के पूर्व तानाशाह रॉबर्ट मुगाबे को गुडविल एम्बेसडर नियुक्त कर दिया था. इस नियुक्ति पर भारी विवाद हुआ था, जिसके बाद मुगाबे को पद से हटाना पड़ा था. और वर्तमान हालात में भी टेड्रोस चीन के साथ संबंधों को लेकर विवादों में घिरे हैं.

चीन की तरफदारी क्यों?
कोरोना वायरस संक्रमण के दुनिया भर में फैल जाने के पीछे चीन को ज़िम्मेदार ठहराए जाने के मामले में डब्ल्यूएचओ की तरफ से टेड्रोस ने चीन की तरफ़दारी की और चीन को दुनिया के संकट के लिए ज़िम्मेदार मानने से इनकार किया. चीन के प्रति टेड्रोस की यह सहानुभूति ज़्यादातर दुनिया को रास नहीं आई. द हिल की रिपोर्ट कहती है कि चीन ने चूंकि इथोपिया में भारी निवेश किया है इसलिए टेड्रोस उसका बचाव करने पर मजबूर हैं.

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चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के साथ डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस. (फाइल फोटो)

क्या हो सकता है टेड्रोस का भविष्य?
चीन से जुड़े विवाद के अलावा डब्ल्यूएचओ फिलहाल सवालों के दायरे में है. कोरोना महामारी पूरी दुनिया में फैल गई और हज़ारों मौतें होने को समय पर सही निर्देशों और गाइडलाइन्स जारी कर इस त्रासदी को कम किया जा सकता था. डब्ल्यूएचओ पर ये आरोप लगातार लग रहे हैं कि उसने अपनी भूमिका समय पर मुस्तैदी से नहीं निभाई. टेड्रोस लगातार अमेरिका के निशाने पर रहे हैं और इस बार यूएन के कई देशों के निशाने पर हैं.

न सिर्फ टेड्रोस का भविष्य खतरे में है, बल्कि खबरें कह रही हैं कि डब्ल्यूएचओ की भूमिका पर भी दोबारा विचार किया जा सकता है. ओआरएफ ने कोविड 19 को लेकर डब्ल्यूएचओ की कमज़ोर, लेटलतीफ और ​बगैर सोचने समझने की रणनीति को लेकर एक आलोचनात्मक ग्राफिक रिपोर्ट प्रस्तुत कर बताया है कि कैसे डब्ल्यूएचओ कोरोना संकट को लेकर नाकाम साबित हुआ.

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