यूरोप में कंपनियां खरीद रहा है चीन, यूरोप कैसे भांप रहा है साज़िश? | Know why experts warning europe to block China buying spree due to covid 19 pandemic | rest-of-world – News in Hindi

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कोविड 19 (Covid 19) वैश्विक महमारी के समय में पहली चिंता तो स्वास्थ्य सुरक्षा (Health Care) की है, लेकिन दुनिया के विकसित देशों की एक बड़ी चिंता अर्थव्यवस्था (Economy) को लेकर भी बनी हुई है. अमेरिका (USA) और यूरोप (Europe) के संपन्न देश जहां इस महामारी से जूझने के दौर में हैं, वहीं महामारी का शुरूआती केंद्र बना चीन (China) यूरोप में आर्थिक जड़ें मज़बूत करने के मौके देख रहा है और यह यूरोप की ताज़ा फिक्र है कि चीन को कैसे रोका जाए.

कोरोना वायरस (Corona Virus) संकट के मुद्दे पर एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप (Donald Trump) ने खुलेआम चीन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है इसलिए अमेरिका में चीनी निवेश (Investment) फिलहाल खास नहीं है लेकिन दूसरी तरफ, वैश्विक महामारी (Pandemic) ने यूरोपीय देशों की कमर तोड़ दी है इसलिए यहां चीन को निवेश के अच्छे मौके मिल रहे हैं. यह यूरोप के लिए खतरे की घंटी क्यों है? साथ ही, यह भी जानें कि किन चेतावनियों के बाद यूरोपीय देश किस तरह संभल रहे हैं.

विशेषज्ञों ने भांपा चीन का खतरा
हालिया घटनाक्रम को देखें तो ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी एमआई6 के पूर्व प्रमुख जॉन सॉवर्स ने चीनी कंपनियों से यूरोपीय तकनीक को बचाने की बात कहते हुए कहा ‘हालांकि तुरंत कोई खतरा नहीं है, लेकिन तकनीक पर नियंत्रण किसी दुश्मनी की दस्तक से कम नहीं है’. डीडब्ल्यू ने यह भी लिखा कि नाटो और यूरोपीय संघ पहले ही यूरोपीय देशों को चेता चुके हैं कि चीन द्वारा अहम इन्फ्रास्ट्रक्चर की खरीदी को लेकर सावधान रहें.किस खरीदारी पर है चीन की नज़र?

तीन साल पहले ब्रिटेन की चिप डिज़ाइनर कंपनी इमैजिनेशन टेक्नोलॉजी पर चीन के अधिकार संबंधी खबरों के बाद यूरोप की सतर्कता बढ़ी दिखी. वहीं, ट्रंप ने इस बात पर भी चिंता ज़ाहिर की थी कि अमेरिका के यूरोपीय सहयोगी 5जी नेटवर्क के विस्तार के लिए चीन की हुआवेई कंपनी का इस्तेमाल कर रहे हैं. बहरहाल, अब चीन की नज़र खास यूरोपीय इन्फ्रास्ट्रक्चर पर है.

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ग्रीस के पाय​रेअस बंदरगाह की यह तस्वीर डीडब्ल्यू ने रिपोर्ट के साथ प्रकाशित की.

ग्रीस के पाय​रेअस बंदरगाह के तीन में से दो टर्मिनल चीन के हाथ में आ चुके हैं और तीसरा भी दूर नहीं है. फॉरेन पॉलिसी की रिपोर्ट की मानें तो चीन की कॉस्को कंपनी ने बेल्जियम की टर्मिनल संचालन कंपनी ज़ीब्रूगी में 90 फीसदी हिस्सेदारी हासिल कर ली है. स्पेन में भी कॉस्को ने सबसे बड़े टर्मिनलों वैलेंशिया और बिल्बाओ के प्रबंधन पर नियंत्रण हासिल कर लिया है. एंटवर्प, ला पैलमैस और रॉटेर्डम में भी चीन के निवेश जारी हैं. एक और रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस की ज्वैलरी कंपनी में चीनी कंपनी ने भारी निवेश किया है.

मेड इन चाइना 2025 का टारगेट?
चीनी निवेशों के पीछे एक वजह बताई जा रही है कि पांच साल बाद चीन अपने कोर सेक्टरों की क्षमताओं के विस्तार में लगा है. एफपी के मुताबिक उत्तर यूरोप पर चीन की खास नज़र है क्योंकि यहां इनोवेशन बेस्ड भारी कारोबार ज़्यादा है. मर्केटर इंस्टिट्यूट की एक और रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी कंपनियां यूरोप के रिसर्च और डेवलपमेंट सेक्टर में भी भारी निवेश देख रही हैं और यह यूरोप के लिए चिंता का विषय हो सकता है.

राष्ट्रीय सुरक्षा के सवाल पर क्या है हाल?
अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर महत्वपूर्ण टेकओवरों के मामले में नियंत्रण ​के लिए विदेशी निवेश पर समिति बनाई. पिछले साल इस समिति ने एक एप के अधिग्रहण के मामले में चीनी कंपनी को अधिग्रहण वापसी के लिए मजबूर भी किया था. यूरोपीय संघ में ऐसा कोई पैना नियंत्रण नहीं है.

इस बात को आप ऐसे समझें कि कोई चीनी कंपनी किसी यूरोपीय कंपनी को अच्छी कीमत का प्रस्ताव दे तो क्या यूरोपीय कंपनी राष्ट्रीय कर्तव्य के आधार पर प्रस्ताव ठुकरा देगी? एफपी के मुताबिक यूरोप में कई महत्वपूर्ण तकनीक की कंपनियां राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर सक्रिय नहीं हैं.

चीन को कैसे रोक रहा है यूरोप?
नाटो, ईयू और अन्य विशेषज्ञों की चेतावनियों के बाद यूरोप के देशों ने चीनी निवेश पर संजीदगी दिखाते हुए कुछ कदम उठाने शुरू किए हैं. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट बताती है कि कौन से देश कैसे स्थिति को काबू कर रहे हैं, सिलसिलेवार जानें.

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इटली में कोरोना वायरस संक्रमण से अब तक 23 हज़ार 660 मौतों का आंकड़ा सामने आया. फाइल फोटो.

इटली : यूरोप में ​कोविड 19 से सबसे ज़्यादा ग्रस्त रहे इस देश के प्रधानमंत्री गिउसेप कोंट ने हाल ही, विदेशी निवेश को लेकर गोल्डन पावर प्रोटेक्शन को मज़बूत करने संबंधी निर्देश दिए. इसके बाद नियंत्रण के दायरे में बैंक, इंश्योरेंस, एनर्जी, स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे और भी अहम सेक्टर शामिल किए गए.

स्पेन : एफडीआई को लेकर स्पेन पहले ही नये नियम लागू कर चुका है. स्पेन सरकार ने मार्च में कहा था कि यूरोपीय संघ के बाहर के निवेशकों को नये ढंग से सरकार की मंज़ूरी लेना होगी, अगर वो 10% से ज़्यादा निवेश चाह रहे हैं, चाहे प्राइवेट सेक्टर में या पब्लिक सेक्टर में.

जर्मनी : एंजेला मर्केल सरकार ने नये नियमों की योजना बनाई है, जिसके तहत देश के हित के आधार पर अगर ‘संभावित दखलंदाज़ी’ का मामला पाया जाएगा तो संबंधित डील को ब्लॉक कर दिया जाएगा, ताकि स्थानीय कंपनियों को यूरोपीय संघ के बाहर की कंपनियों के हाथ में जाने से रोका जा सके.

और क्या होगी चीन की रणनीति?
विशेषज्ञों के मुताबिक चीन उन देशों में निवेश के मौके देख सकता है, जहां उसके खिलाफ ​कड़े नियम आड़े न आ रहे हों, वहीं जिन देशों ने नियंत्रण के तरीके अपनाए हैं, वहां स्वीकृत 10 या 20 फीसदी तक के निवेश पर चीन की नज़र रहेगी. स्पेक्टेटर की रिपोर्ट का शीर्षक है ‘क्या जर्मनी को यूरोप से ज़्यादा चीन की ज़रूरत है?’ इसमें कहा गया है कि आपदा के बाद बनी आर्थिक संकट की स्थिति में जर्मनी को चीन के बाज़ार और वित्तीय शक्ति की भारी ज़रूरत है. और इसका फायदा चीन उठा सकता है.

इसी तरह, डिप्लोमैट के लेख का शीर्षक है ‘क्या इटली का आर्थिक संकट चीन के लिए सुअवसर है?’ इसमें इटली और चीन के कारोबारी संबंधों के विस्तृत ब्योरे के बाद निष्कर्ष के तौर पर कहा गया है कि हालिया वैश्विक महामारी से बने हालात के बाद समस्याओं से जूझने के अवसरों के साथ ही यूरोपीय संघ के भविष्य पर खतरा यह होगा कि वह अपनी संस्थाओं की भूमिका कैसे नये सिरे से तय कर सकेगा.

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