तो क्या अब अफ्रीका में तबाही मचाएगा कोरोना? कितनी लाख जानें लेगा वायरस? | Know how corona virus would perish africa continent | rest-of-world – News in Hindi

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यूरोप (Europe) और अमेरिका (USA) में कहर ढा चुका कोरोना वायरस (Corona Virus) अब अफ्रीका महाद्वीप (Africa Continent) को तबाही का नया केंद्र बना सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र (United Nations) जैसी अंतर्राष्ट्रीय ​संस्थाओं ने अफ्रीकी देशों में कोविड 19 (Covid 19) के कारण कई लाख जानें जाने का अनुमान जारी किया है और जो विश्लेषण सामने आ रहे हैं, वो पूरी दुनिया के लिए चिंता के कारण हो सकते हैं.

तो क्या 33 लाख मारे जाएंगे?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अफ्रीका क्षेत्र (Africa Region) के प्रमुख अधिकारी मिशेल याओ कह चुके हैं कि अगले छह महीनों में अफ्रीका महाद्वीप में कोविड 19 के 1 करोड़ से ज़्यादा गंभीर मामले (Severe Cases) सामने आ सकते हैं. वहीं, यूएन की एक संस्था की रिपोर्ट (Report) में कहा गया है कि अगर वायरस (Virus) के खिलाफ पुख्ता एक्शन नहीं लिये गए तो 33 लाख लोग तक मारे जा सकते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि महाद्वीप में सबसे अच्छी स्थिति में भी 3 लाख मौतों की आशंका है.

अभी किस हाल में है अफ्रीका?अफ्रीकी देशों में आने वाले हालात को लेकर लंदन के इंपीरियल कॉलेज की रिपोर्ट ने भी 3 लाख मौतों की आशंका जताई है. वहीं, ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक अफ्रीका महाद्वीप में अब तक कोरोना वायरस संक्रमण के 23 हज़ार से ज़्यादा केस सामने आ चुके हैं और 1100 से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं. ये आंकड़े आपको चिंता में नहीं डाल रहे होंगे तो सवाल उठेगा कि आगे इतना खतरा क्यों देखा जा रहा है.

अफ्रीका क्यों है अतिसंवेदनशील?
यूएन की रिपोर्ट के हवाले से हफपोस्ट ने लिखा है कि व्यापक गरीबी और घनी बस्तियों में आबादी के रहने के कारणों से अफ्रीका संक्रमण को लेकर अति संवदेनशील हो जाता है. साथ ही, यहां एचआईवी और टीबी जैसे रोग पहले ही बड़े पैमाने पर फैले हुए हैं इसलिए लोगों की इम्युनिटी प्रभावित है. ऐसे में, वायरस का खतरा काफी बढ़ जाता है. गरीब महाद्वीप कहे जाने वाले अफ्रीका में समस्याओं की कमी नहीं है.

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20 अप्रैल को डब्ल्यूएचओ अफ्रीका क्षेत्र ने ये आंकड़े ट्वीट किए.

मेडिकल सुविधाओं के नाम पर शून्य!
खबरों के हवाले से हफपोस्ट की रिपोर्ट कहती है कि अफ्रीका के दस देशों के पास एक भी वेंटिलेटर नहीं है. दक्षिण सूडान, माली, मध्य अफ्रीका गणतंत्र और कोंगो जैसे कई देशों के पास पांच या उससे कम वेंटिलेटर हैं. अगर ये मशीनें दान में मिलती भी हैं तो इन्हें चलाने वाले ट्रेंड स्टाफ की भारी कमी है. यही नहीं, मास्क और ऑक्सीजन जैसे ज़रूरी मेडिकल उपकरण तक इन देशों में समस्याएं हैं.

गरीबी का आलम और भयानक है!
यूएन की रिपोर्ट की मानें तो अफ्रीकी देशों में सिर्फ 34 फीसदी आबादी के पास हाथ धोने की बेसिक सुविधा उपलब्ध है. डब्ल्यूएचओ भी चेता चुका है कि पानी और साबुन की भारी कमी इस महामारी के समय में बड़ी समस्या बन सकती है. सोमालिया के महामारी विशेषज्ञ महाद हसन के हवाले से लिखा गया है कि ‘हम नाकाम होने जा रहे हैं. आगे बहुत दर्दनाक समय खड़ा है.’ गौरतलब है कि सोमालिया के लोक स्वास्थ्य सिस्टम में एक भी वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं है.

सावधानी के तरीके अपनाना भी टेढ़ी खीर?
समस्याओं की कमी अफ्रीका में नहीं है. पानी और साबुन नहीं है तो बार बार लोग हाथ कैसे धोएं? साथ ही, गरीबी के कारण बहुत बड़ी आबादी रोज़ का भोजन रोज़ खरीदकर पेट भरती है. स्टॉक करना संभव नहीं है. सरकार भले ही सोशल डिस्टेंसिंग की सलाह दे, लेकिन लाखों करोड़ों लोगों को रोज़ बाज़ार जाना ही है और जैसा कि बताया जा चुका है, मास्क की भी भारी कमी है. केन्या बेस्ड आर्थिक विशेषज्ञ शॉन जी रॉस के हवाले से वॉक्स ने लिखा है :

कोरोना संकट के गहराते ही यहां खाद्य सुरक्षा का संकट गहराएगा. अफ्रीका में, करोड़ों लोग गरीबी रेखा पर या उससे थोड़ा ही ऊपर जीते हैं यानी रत्ती भर का भी संकट एक बहुत बड़ी आबादी को गरीबी की गर्त में धकेल देगा.

अभी कम क्यों हैं आंकड़े?
इतनी मुश्किलों के बावजूद अब तक अफ्रीका में आंकड़े इतने कम क्यों हैं? इस सवाल का जवाब देते हुए वॉक्स ने लिखा है कि पहला केस अफ्रीका में फरवरी के आखिरी हफ्ते में आया था लेकिन पूरे अफ्रीका ने फरवरी के पहले हफ्ते से ही महामारी के खिलाफ लड़ने के प्रयास शुरू कर दिए थे. इबोला वायरस से पांच साल पहले जूझ चुके अफ्रीका ने इस मामले में तेज़ी दिखाई. दूसरी बात यह कि यहां 98 फीसदी आबादी 65 साल से कम उम्र की है इसलिए भी स्वास्थ्य विशेषज्ञ मान रहे हैं कि संक्रमण अब तक कम फैला है.

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लॉकडाउन में ढील के बाद घाना के एक बाज़ार में उमड़ी भीड़ की यह तस्वीर वॉक्स ने छापी.

इसके अलावा, अफ्रीका सीडीसी ने अब तक पूरे महाद्वीप में 10 लाख लोगों के टेस्ट किए हैं. लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के नज़रिये से रिपोर्ट में कहा गया है कि 1 अरब से ज़्यादा की आबादी वाले महाद्वीप में अगले तीन महीनों के भीतर डेढ़ करोड़ टेस्ट किए जाने की ज़रूरत है.

आखिरकार मजबूरी के उदाहरण
– इथोपिया में अभी ही 10 लाख लोगों का रोज़गार छिन चुका है.
– कोरोना की दस्तक से पहले महाद्वीप में 25 करोड़ लोगों के सामने खाद्य संकट था और 25 फीसदी अफ्रीकी आबादी कुपोषित है.
– अफ्रीका में यूएन के भोजन कार्यक्रम में अधिकारी ब्रायन बोगार्ट ने कहा ‘दुनिया के इस हिस्से में ‘फ्लैटनिंग द कर्व’ औचित्यहीन है, जहां मेडिकल क्या मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं.’
– केन्या में लॉकडाउन की जगह कर्फ्यू लगाया गया और पुलिस की ज़्यादतियों से इस दौरान मौतों की संख्या कोरोना से हुई मौतों से ज़्यादा हो गई.
– तंज़ानिया के राष्ट्रपति मगुफुली के शब्दों में विवशता : ‘कोरोना वायरस ईसा मसीह के शरीर में ज़िंदा नहीं रह सकता. इसलिए मैं पवित्र प्रार्थनाओं का हामी हूं और आप भी धर्म व प्रार्थना का रास्ता अपनाएं क्योंकि यही दैवीय उपकार ही अब बचा सकता है.’

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