इस देश के लोग अपने बूते संक्रमण से लड़ रहे जंग, राष्ट्रपति ने कोरोना के अस्तित्व से किया इनकार | belarus ngo and crowdfunds to fight with coronavirus as leader denies it exists | rest-of-world – News in Hindi

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इस देश के लोग अपने बूते संक्रमण से लड़ रहे जंग, राष्ट्रपति ने कोरोना के अस्तित्व से किया इनकार

बेलारूस के लोग अपने बूते कोरोना वायरस के संक्रमण से जंग लड़ रहे हैं.

बेलारूस (Belarus) के राष्ट्रपति ने कोरोना वायरस (Coronavirus) का अस्तित्व होने से ही इनकार कर दिया है.

मिंस्क: बेलारूस (Belarus) कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण से जूझ रहा है. लेकिन वहां की सरकार कोरोना के संकट को स्वीकार करने को तैयार नहीं है. मजबूरी में बेलारूस के स्वयंसेवी संगठनों और लोगों ने मिलकर कोरोना के संक्रमण से मुकाबला करने का फैसला किया है. स्वयंसेवी संगठन और क्राउडफंडिंग ( लोगों से पैसा इकट्ठा कर) के जरिए हेल्थकेयर सिस्टम को दुरुस्त किया जा रहा है और कोरोना के संक्रमण से लड़ने की तैयारी की गई है.

पिछले दिनों बेलारूस के राष्ट्रपति ने कोरोना के अस्तित्व को मानने से ही इनकार कर दिया. राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेन्को ने कोरोना वायरस की महामारी को मनोविकृति के रूप में खारिज कर दिया. पिछले हफ्ते राष्ट्रपति ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि देश में कोई भी कोरोना वायरस से नहीं मरने वाला है.

स्वयंसेवी संगठन की मदद से कोरोना से जंग की तैयारी
गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद एक मानव अधिकार कार्यकर्ता और स्वयंसेवी एंद्रेज स्ट्रीजक सामने आए. उन्होंने कोविड-19 नाम से एक ग्रुप बनाया है. इन्होंने क्राउडफंडिंग के जरिए पैसे इकट्ठा किए हैं और उससे मेडिकल उपकरण और पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्वीपमेंट खरीदकर मेडिकल वर्कर्स को दिए हैं. वो कोरोना से लड़ने वाले मेडिकल वर्कर्स की हरसंभव सहायता कर रहे हैं. इस काम में कुछ दूसरे स्थानीय एनजीओ और कुछ बिजनेसमैन भी मदद कर रहे हैं.एंद्रेज का कहना है कि हमारी कोशिश है कि हमारा सिस्टम बर्बाद न हो. उन्होंने कहा कि बहुत से जगहों पर काफी खराब हालात हैं. बेलारूस के नॉर्थ ईस्ट के एक शहर विटेक्स में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. हालात गंभीर बने हुए हैं. वहां बीमारों की तादाद काफी ज्यादा है. यहां तक कि मेडिकल वर्कर्स भी काफी संख्या में बीमार हैं.

बेलारूस में मास्क की हो रही कालाबाजारी
बेलारूस में मेडिकल उपकरणों की कमी की वजह से हालात बुरे हो गए हैं. मास्क की कालाबाजारी हो रही है. एक मास्क 12 पाऊंड यानी हजार रुपए से ज्याद में मिल रहा है. एंद्रेज और उनकी टीम ने करीब 1 लाख पाउंड की रकम इकट्ठा की है और उससे सांस देने की मशीन, प्रोटेक्टिव क्लॉथिंग और दूसरे मेडिकल उपकरण खरीदकर बांटे हैं.

एंद्रेज का कहना है कि सबसे बड़ी मुश्किल सांस देने की मशीन को लेकर है. उनका कहना है कि अगर आप सरकार के पास उपलब्ध संसाधनों को देखेंगे तो निराशा होगी. हम इसमें हेल्थकेयर सिस्टम को सपोर्ट कर रहे हैं.

विटेस्क के एक डॉक्टर का कहना है कि यहां के हॉस्पिटलों के हालात बहुत बुरे हैं. मेडिकल वर्कर्स के पास प्रोटेक्टिव सूट नहीं है. इसके बिना संक्रमितों का इलाज करने की वजह से वो बीमार पड़ रहे हैं.
बेलारूस के राष्ट्रपति की कोरोना वायरस को लेकर जारी किए गए बयान की आलोचना हो रही है. बेलारूस की आबादी करीब 95 लाख है. कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए ये बिल्कुल तैयार नहीं है.

देश के हेल्थ मिनिस्टर ने कोरोना वायरस के संक्रमण के 4,204 मामलों की पुष्टि की है. संक्रमण की वजह से करीब 40 लोगों की मौत हुई है. पड़ोसी देशों की तुलना में बेलारूस में संक्रमण ज्यादा तेजी से फैल रहा है.

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First printed: April 17, 2020, 5:38 PM IST



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